सरकारी डबल गेम, कोरोना बजा न दे हमारा बैण्ड

  2021-03-14 01:20 pm
<p>कोरोना के नाम पर खुलकर डबल गेम हम आम पब्लिक के साथ हो रहा है। आम पब्लिक के लिए कुछ और नियम है तो राज में अहम पार्ट अदा करने वालों के लिए कुछ और नियम बने हुए है। सरकार का डबल गेम पब्लिक के जीवन का &lsquo;बैण्ड&rsquo; न बजा दे यहीं डर हर समय सताता है। हमारे जीवन पर भारी राजनीतिक स्वार्थ हो गए है। डबल गेम की बात करे तो देखेंगे कि सरकार के मन में पब्लिक के लिए कोरोना का डर ऐसा है कि शादियों में 200 एवं अंतिम संस्कार में 20 से ज्यादा व्यक्ति नहीं मिल सकते, उन्हें लगता इससे अधिक लोगों की मौजूदगी कोरोना को अपना जाल फैलाने का अवसर दे देगी। कोरोना से डरने वाले ये सरकारी चेहरे उस समय बेखौफ हो रहे जब बात नेताओं की संभाओं की आती है या राजनीतिक दलों की रैलियां निकालने की होती है। धार्मिक जलसे में भी कोरोना का डर नजर नहीं आता है। ये समझ नहीं आता है कि कोरोना यदि 200 आदमियों की मौजूदगी वाली शादी में फैल सकता है तो 60 हजार लोगों की मौजूदगी वाले क्रिकेट मैच और 50-70 हजार लोगों की मौजूदगी वाली जनसभाओं में इसका खतरा क्यों नहीं है। यदि हजारों लोगों में कोरोना का डर नहीं है तो शादियों व अंतिम संस्कार जैसे मौकों पर इसका डर दिखाना असरकारी नहीं हो सकता। हर जुबां पर सवाल यहीं है कि हमारे निजी आयोजनों में कोरोना का खतरा है तो बड़े सार्वजनिक आयोजनों में कोरोना का वायरस कौनसी कोठरी में छुप जाता है। कई बार तो लगता है कि कोरोना वायरस भी सरकार के लिए एक सुविधाजनक रोग हो गया है जिसमें जब चाहे डर दिखा कुछ भी काम होने से रोका जा सकता है और जब चाहे खतरे से मुक्त बता अपने राजनीतिक मंसूबों को पूरा किया जा सकता है। कोरोना का डर दिखा बच्चों को पूरे साल स्कूलों से दूर रखा गया है लेकिन इन्हीं बच्चों को शॉपिंग माल में ले जाने या भीड़ भरे वाहनों में यात्रा कराने से कोई नहीं रोक रहा। नेताओं के चेहरे पर लगने वाला ये दोहरा मुखोटा जनता में उनके प्रति पहले ही ही नगण्य रह गए विश्वास को और तार-तार कर देने वाला है। राजनीतिक नेताओं ने अपनी कथनी व करनी को एक समान नहीं किया तो उनके लिए आमजन का भरोसा जीतना आसमान से सितारे तोड़कर लाने के समान ही रहेगा। आज सबसे प्रबल जरूरत इस बात की है कि हम बचाव के लिए जीवन की अलग-अलग कीमत नहीं लगाए और कोरोना के प्रति एक समान नीति अपनाकर दिखाए।</p> <p>स्वतंत्र पत्रकार&nbsp;</p>
news news news news news news news news