भगवान देवनारायण की कलश एवं शोभायात्रा 15 फरवरी  को

भगवान देवनारायण की कलश एवं शोभायात्रा 15 फरवरी को

  2024-02-12 07:09 pm
<p><br /> चित्तौडगढ़&nbsp; । &nbsp; हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी भगवान देवनारायण की 1112वीं जयन्ति पर चित्तौडगढ गुर्जर समाज एवं सर्व समाज द्वारा भगवान देवनारायण की कलश एवं शोभायात्रा 15 फरवरी 2024 गुरूवार को रखी गयी हैं। यह शोभायात्रा प्रातः 9 बजे पाडनपोल से प्रारम्भ होकर शहर के विभिन्न मार्गो से होती हुई सैंथी भगवान देवनारायण मन्दिर पर सम्पन्न होगी। यात्रा के दौरान कलश लिए महिलाएॅ एवं भगवान देवनारायण जी की झांकी घोडे एवं डीजी बेण्ड बाजों के साथ यात्रा निकाली जाएगी।<br /> कर्नल किरोडीमल बेंसला संगठन के जिलाध्यक्ष राजकुमार गुर्जर ने बताया कि सैंथी स्थित भगवान देवनारायण मन्दिर को नीलाखुर मन्दिर के नाम से भी जाना जाता है, यहां मन्दिर के विषय मे बताया जाता है कि भगवान देवनारायण मालवा से मेवाड़ जाते समय यहॉ पर कुछ दिनों तक विश्राम लिया था जहॉ पर देवनारायण का घोड़ा रूका वहां पर आज भी घोड़े के खुर के निशान पत्थर पर मौजुद हैं। भगवान देवनारायण के दर्शन के लिए लोग आते थे उनमे से दुखी व्यक्ति का दुख दूर करने के लिए भगवान देवनारायण ताम्बे के तार से बिटी/अंगुठी (रिंग) बनाकर दुखी आदमी को पहनाने के लिए देते थे जिससे उसके दुख दूर हो जाते थे।<br /> इसके साथ और भी कई कथाएॅ जुडी है उसमें से एक कथा यह है कि एक सारंगदेव साजी की है जो 80 वर्ष के थे और चित्तौडगढ के निवासी थे जो स्वर्ग सिधार गये थे उनकी धर्मपत्नि जेतुबाई लाश को लेकर भगवान देवनारायण के पास गयी थी, भगवान देवनारायण ने सांरगदेव साजी को जिन्दा कर 25 वर्ष का लड़का बना दिया और जेतुबाई को 20 वर्ष की कन्या बना कर जोड़ी को नौजवान बना दिया। जेतु बाई को मायरा पहनाया और अपनी धर्म बहिन बना नाम अमर कर दिया।</p>
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