मुफ्त का चस्का ... नही राह दिखाये

  2021-09-14 09:20 am
<p>इंगलैंड के गत चुनाव में वहां की लेबर पार्टी ने जनता को मुफ्त ब्रॉडबैंड, मुफ्त बस यात्रा और मुफ्त कार पार्किंग जैसी सुविधाओं का प्रलोभन दिया था। हम भी क्यों पीछे रहते। उत्तर प्रदेश में कुछ वर्ष पूर्व छात्रों को मुफ्त लैपटॉप दिए गए, तमिलनाडु में चुनाव से पूर्व किचन ग्राइंडर और साइकिल वितरित करने का आश्वासन दिया गया, दिल्ली में एक सीमा के अंतर्गत मुफ्त बिजली और पानी दिया जा रहा है और केंद्र सरकार द्वारा मुफ्त गैस सिलैंडर, एल.ई.डी. बल्ब और खाद्यान्न वितरित किए जा रहे हैं।&nbsp;<br /> <br /> निश्चित रूप से इस प्रकार के सीधे वितरण से जन कल्याण हासिल होता है। जिस छात्र को लैपटॉप मिल जाता है, वह उससे अपने कौशल को सुधार कर जीवन में आगे बढ़ सकता है लेकिन कहावत है कि किसी को मछली देने की बजाय मछली पकडऩा सिखाना ज्यादा उत्तम है क्योंकि इससे वह आजीवन अपने भोजन की व्यवस्था कर सकता है। इसलिए सरकार के लिए जरूरी है कि वह अपने सीमित राजस्व का उस स्थान पर निवेश करे जहां जनता का लम्बे समय तक और अधिकाधिक कल्याण हो सके।&nbsp;<br /> <br /> अक्सर इस प्रकार के मुफ्त वितरण के वायदे चुनाव पूर्व किए जाते हैं। कांग्रेस ने 2009 में किसानों की ऋण माफी का वायदा किया और सत्ता हासिल की थी। तमिलनाडु का उदाहरण हम ऊपर दे ही चुके हैं। इस प्रकार के वायदों से सरकार के राजस्व का उपयोग पार्टी के हितों को साधने के लिए किया जाता है। जैसे यदि कांग्रेस सरकार ने 2009 में ऋण माफी का वायदा किया अथवा वर्तमान में केन्द्र सरकार एल.पी.जी. गैस के सिलैंडर बांट रही है तो इसका लाभ पार्टी विशेष को मिलता है, जबकि इन मुफ्त सुविधाओं को वितरित करने का भार सरकार के राजस्व पर पड़ता है। अत: उच्चतम न्यायालय ने हाल में ही नोटिस जारी किया है कि चुनाव पूर्व इस प्रकार के वायदों पर रोक क्यों न लगाई जाए?<br /> <br /> केन्द्र सरकार को इस दिशा में स्वयं पहल करके इस प्रकार के चुनाव पूर्व वायदों को प्रतिबंधित करने का राष्ट्रव्यापी कानून बनाना चाहिए।&nbsp;सरकार द्वारा तीन प्रकार की सुविधाएं दी जाती हैं। पहली सुविधा सार्वजनिक, जो केवल सरकार द्वारा दी जा सकती है, दूसरी सुविधा उत्कृष्ट, जो व्यक्तिगत है लेकिन उसका समाज पर प्रभाव पड़ता है और तीसरी व्यक्तिगत, जो कि व्यक्ति विशेष मात्र को लाभ पहुंचाती है? सार्वजनिक सुविधाएं जैसे- रेलवे, ग्रामीण सड़कें अथवा कोविड से बचने के लिए क्या कदम उठाए जाएं, इसकी जानकारी। सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी ऐसी सार्वजनिक सुविधाओं को उपलब्ध कराने की होनी चाहिए।&nbsp;<br /> <br /> इससे आगे कुछ सुविधाएं व्यक्तिगत लेकिन &lsquo;उत्कृष्ट&rsquo; कही जा सकती हैं। जैसे किसी व्यक्ति द्वारा मास्क पहनना मूलत: व्यक्तिगत सेवा है। वह बाजार से 10 रुपए का मास्क खरीदकर पहन सकता है। इसमें सरकार द्वारा वितरण करने की जरूरत नहीं है लेकिन व्यक्ति के मास्क पहनने से दूसरों का संक्रमण से बचाव होता है। इसलिए सरकार मास्क बांटे और लोगों को उसे लगाने के लिए प्रेरित करे तो यह सुविधा व्यक्तिगत होने के बावजूद उत्कृष्ट कही जाती है। इसकी तुलना में कुछ सुविधाएं मुख्यत: व्यक्तिगत कही जा सकती हैं। जैसे मुफ्त बिजली-पानी, मुफ्त गैस सिलैंडर, मुफ्त साइकिल अथवा लैपटॉप। इस प्रकार की सेवाओं को वितरित करने से व्यक्ति विशेष मात्र को लाभ होता है, पूरे समाज को नहीं, परन्तु सरकार का राजस्व खप जाता है।&nbsp;<br /> <br /> सरकार को चाहिए कि इन तीनों प्रकार की सुविधाओं का जनकल्याण की दृष्टि से आकलन कराए। गांव में सड़क बना दी जाए तो जन कल्याण पर सीधा और गहरा प्रभाव पड़ता है क्योंकि बच्चे शिक्षा प्राप्त करने के लिए शहर जा सकते हैं और किसान अपनी सब्जी को शहर पहुंचा सकता है, अपनी आय को आगे तक अर्जित करने में सक्षम हो जाता है। उत्कृष्ट सेवाओं से भी लाभ होता है लेकिन सार्वजनिक सेवाओं की तुलना में कम। जैसे यदि मास्क बांटा जाए तो लाभ अवश्य होता है लेकिन सड़क की तुलना में इसका लाभ कम होगा चूंकि मास्क तो व्यक्ति स्वयं भी लगा लेता है। तीसरी व्यक्तिगत सुविधाओं का लाभ न्यून ही होता है यद्यपि इनमें खर्च जादा आता है। जैसे मुफ्त बिजली-पानी उपलब्ध कराने के लिए वर्ष दर वर्ष सरकार को भारी रकम चुकानी पड़ती है जबकि उसका सामाजिक लाभ नहीं होता। यदि यही रकम दिल्ली की झुग्गियों में सड़क, बिजली और मुफ्त वाई-फाई उपलब्ध कराने में लगाई जाए तो जनता को और आय अर्जित करने में सुविधा होगी और उसका जीवन स्तर उत्तरोत्तर सुधरता जाएगा।&nbsp;<br /> <br /> उसकी कुछ योजनाएं उत्कृष्ट श्रेणी की हैं, जैसे किसान को पैंशन, ग्रामीण कौशल योजना, दीनदयाल उपाध्याय योजना, अंत्योदय योजना, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना, मातृत्व वंदना योजना और स्वामित्व योजना लेकिन केंद्र सरकार द्वारा तमाम ऐसी योजनाएं चलाई जा रही हैं जो केवल व्यक्तिगत लाभ पहुंचाती हैं जैसे उन्नत जीवन योजना के अंतर्गत एल.ई.डी. वितरण योजना आदि। इस प्रकार की योजनाओं से वोट अवश्य मिलते हैं लेकिन इससे जनता का दीर्घकालिक और स्थाई विकास नहीं होता। &nbsp;इस दृष्टि से केंद्र सरकार को तमाम योजनाओं पर पुनॢवचार करना चाहिए।</p>
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