Video-अंबेश-सौभाग्य-दाना-पानी-नाम-दिया-आश्रम-के-कबूतरखाना-को

Video अंबेश सौभाग्य दाना पानी नाम दिया आश्रम के कबूतरखाना को

मोतीबोर का खेड़ा (मूलचन्द पेसवानी)/श्रमण संघीय महामंत्री श्रीसौभाग्य मुनि मसा ने देवगढ़ में होली चार्तुमास का विहार करने के मौके पर आयोजित समारोह में मोतीबोर का खेड़ा ग्राम में स्थित श्रीनवग्रह आश्रम में उनकी प्रेरणा से स्थापित किये गये कबूतर खाने का नामाकरण अंबेश सौभाग्य दाना पानी किया। उन्होंने कहा कि अब नवग्रह आश्रम में रोगियों के उपचार के साथ वहां पर पहुंचने वाले भांति भांति के पक्षियों को दाना पानी भी मिलेगा। आश्रम संचालक हंसराज चोधरी ने बताया कि 8 दिसंबर 18 को गुरूदेव श्रमण संघीय महामंत्री श्सौभाग्य मुनि मसा के आश्रम में प्रवास करने के दौरान दिये निर्देशों पर विशाल कबूतरखाना का निर्माण करवाया गया है जहां पर प्रतिदिन अभी 50 किलो अनाज डाला जाता है। प्रतिदिन वहां पर सैकड़ों पक्षियों का डेरा रहता है जिसमें भी भांति भांति के पक्षी एक ही स्थान पर दाना चुगने पहुंच रहे है। आश्रम संचालक हंसराज चोधरी ने श्रमण संघीय महामंत्री श्रीसौभाग्य मुनि मसा के संग देवगढ़ पहुंचने से पहले ही वहां पहुंचे और करीब 5 किलोमीटर पैदल यात्रा उनके संग की। इस दौरान आश्रम की गतिविधियों केबारे में लंबी मंत्रणा भी की गई। श्रमण संघीय महामंत्री सौभाग्य मुनि मसा ने देवगढ़ में हंसराज चोधरी का सम्मान करते हुए कहाकि आज आश्रम देश व दुनियां में रोगियों के लिए पहचाना जाता था अब वहां पर अंबेश सौभाग्य दाना पानी स्थापित होने के कारण देश व दुनियां के पक्षियों का भी जमावड़ा लगेगा। सौभाग्यमुनि ने भक्ति की विषद विवेचना करते हुए कहा कि हम सामायिक, प्रार्थना, जप-साधना आदि के समय प्रभु का स्मरण करते हुए एकाग्र रहते हैं। यह स्मरण भक्ति है। जितनी देर कर सके अच्छा है, पर सामान्य सांसारिक दिनचर्या में आने के कुछ समय बाद इसका प्रभाव कम पड़ जाता है। तब पाप कर्म से तभी दूर रह पाएंगे, जब हम परमात्मा को सामने देखेंगे। जब भी झूठ बोलने या क्रोध करने की परिस्थिति बने, अपने सामने भगवान महावीर को खड़ा कर दो। हम जहां भी रहे, जो भी करें यदि परमात्मा को ध्यान में रखकर करेंगे तो जीवन जीने का तरीका ही बदल जाएगा। ज्ञान को सुनकर जीवन में उतारने का लक्ष्य रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि ज्ञान का महत्व ही आचरण में उतारने से है। बत्तीस आगमों का ज्ञान और कई आगम कंठस्थ होना जितना महत्वपूर्ण नहीं, उतना महत्वपूर्ण उस ज्ञान को जीवन में उतारना है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार बहुत बड़े पुल में मामूली कील का भी महत्व होता है। उसी प्रकार परिवार समाज में हर व्यक्ति के अस्तित्व महत्व को स्वीकार करते हुए चलेंगे, तभी सामजस्य बना रहता है। कम बोलने से विवाद से बचेगें, ज्यादा बोलने वाले का कोई आदर-सम्मान नहीं होता। इस दोरान मेवाड़ प्रवर्तक मदन मुनि, जैनश्रमण संघीय महामंत्री श्सौभाग्य मुनि कुमुद आदि ठाणा एवं देवगढ़ संघ के पदाधिकारी मौजुद रहे।

Loading...