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अक्षय तृतीया पर 24 साल बाद नहीं होंगी शादियां,भीलवाड़ा हलचल ऐप को अपडेट करें

अक्षय तृतीया पर 24 साल बाद नहीं होंगी शादियां,भीलवाड़ा हलचल ऐप को अपडेट करें

 अक्षय तृतीया के दिन शादी विवाह के लिए शुभ मुहूर्त नहीं देखा जाता है, लेकिन इस बार अक्षय तृतीया पर शादी नहीं हो सकेंगी. क्योंकि इस बार अक्षय तृतीया पर भी शादी के मुहूर्त नहीं हैं.

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ऐसा संयोग लगभग 24 साल बाद बन रहा है, जब अक्षय तृतीया पर शादी-विवाह नहीं होगी. हालांकि अक्षय तृतीया को महामुहूर्त माने जाने से शुभ संस्कार किए जा सकेंगे. इस साल मई और जून में एक भी दिन विवाह मुहूर्त नहीं है. इसकी वजह से इन दोनों माह में शुक्र ग्रह अस्त रहेगा. उसके उदित होने के बाद जुलाई में ही विवाह के मुहूर्त मिलेंगे. शुक्र ग्रह के उदित होने के बाद जुलाई में ही विवाह मुहूर्त शुरू होंगे. ऐसी स्थिति वर्ष 2000 में भी बनी थी, तब भी मई और जून में विवाह मुहूर्त नहीं था.

 

स्वयं सिद्ध अबूझ मुहूर्त
धर्म शास्त्रों में अक्षय तृतीया तिथि को स्वयं सिद्ध अबूझ मुहूर्त माना गया है, इस तिथि पर बिना मुहूर्त का विचार किए सभी प्रकार के शुभ कार्य किए जाते हैं. इस दिन कोई भी शुभ मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, सोने-चांदी के आभूषण, घर, भूखंड या वाहन आदि की खरीददारी से सम्बंधित कार्य करने के लिए शुभ मुहूर्त नहीं देखा जाता है. इस अबूझ मुहूर्त की तिथि पर व्यापार आरम्भ, गृह प्रवेश, वैवाहिक कार्य, सकाम अनुष्ठान, दान-पुण्य,पूजा-पाठ अक्षय रहता है. हालांकि इस साल अक्षय तृतीया पर शादी विवाह नहीं किए जा सकेंगे.

देव गुरु और शुक्र ग्रह के अस्‍त होने से बनी ऐसी स्थिति
सनातन धर्म के रिति रिवाज में शादी-विवाह करने के लिए शुभ मुहूर्त निकाला जाता है. शादी के लिए मुहूर्त निकालते समय गुरु और शुक्र ग्रह की स्थिति को बहुत ही खास माना जाता है. ये दोनों ग्रह शुभ होते हैं. ज्योतिष शास्त्र में शुक्र ग्रह को रचनात्मकता, भौतिक सुख, प्रेम, सौंदर्य, विवाह आदि का कारक ग्रह माना गया है. शुक्र ग्रह को प्रेम का प्रतीक माना जाता है. वहीं देव गुरु बृहस्पति किसी पुरुष के जीवन में उसके जीवनसाथी के बारे में बताते है. बृहस्पति ही पुरुष के वैवाहिक जीवन को संतुलित करते हैं. जब ये दोनों ग्रह सूर्य के नजदीक आ जाते हैं तो इनका असर कम हो जाता है और ये अस्‍त हो जाते हैं. शुक्र देव 27 जून तक अस्‍त रहेंगे. वहीं देव गुरु बृहस्पति 5 जून तक अस्त रहेंगे. इस लिए मई और जून में गुरु और शुक्र अस्‍त रहने से विवाह नहीं हो सकेंगे. इस बीच 10 मई को अक्षय तृतीया पड़ेगी और इस दिन अबूझ मुहूर्त होने के बाद भी गुरु-शुक्र के अस्‍त होने के कारण विवाह नहीं हो सकेंगे.

 

15 जुलाई के बाद नवंबर तक करना पड़ेगा इंतजार
जुलाई महीने में भी शादियों के लिए सिर्फ कुछ ही मुहूर्त हैं. जुलाई में 2, 3, 4 और 9 जुलाई को विवाह मुहूर्त हैं. इसके बाद 11 जुलाई, 12 जुलाई, 13 जुलाई, 14 जुलाई और 15 जुलाई को भी विवाह के लिए शुभ मुहूर्त हैं. फिर 17 जुलाई को देवशयनी एकादशी से चातुर्मास शुरू हो जाएगा. इस कारण दोबारा शादियों पर ब्रेक लगेगा और 16 जुलाई से 11 नवंबर तक कोई शादी मुहूर्त नहीं है.

गुरु और शुक्र विवाह का कारक ग्रह
ज्योतिष शास्त्र में गुरु और शुक्र को विवाह का कारक ग्रह माना गया है. विवाह के लिए कुंडली मिलान, गुण दोष मिलान किया जाता है. वहीं यदि आकाश मंडल में गुरु और शुक्र ग्रह उदितमान हो तो ही विवाह के शुभ मुहूर्त होते हैं. गुरु और शुक्र तारा अस्त होने से शुभ संस्कार नहीं किए जाएंगे. इसलिए वैशाख शुक्ल तृतीया यानी अक्षय तृतीया को महामुहूर्त के बाद भी विवाह नहीं किए जा सकेंगे.